उपनिषदों का मूल तत्व है ब्रह्म(परमात्मा), जीव(आत्मा)
और जगत (संसार)। जगत गुरु श्री मन्त शंकरदेव ने सिद्धांत दिया है कि ब्रह्म निराकार सर्वशक्तिमान सर्वव्याप्त हैं ।ब्रह्मा विष्णु शिव जी सरस्वती लक्ष्मी पार्वती दुर्गा काली लेकर साधारण मनुष्य पशु पक्षी वृक्ष लता कीट पतंग सब है शरीर धारी ।सभी शरीर में जीवात्मा वास करते हैं । जीव जगत और जड़ जगत मिलकर यह संसार हैं । श्री मन्त शंकरदेव ही एक ऐसा महापुरुष हैं जिन्होंने निर्गुण निराकार ब्रह्म को ज्ञान रूपी जटिलता से निकल कर एक संस्कारित सात्विक परमानंद रुप संस्कृति में रूपान्तरित कर दिया ।
शंकरदेव के द्वारा सृजन किया गया बरगीत नाटक भाओना सत्रीया नृत्य भटीमा और अनेक शास्त्रों यह सबको एकत्र रुप में शंकरदेव संस्कृति या शंकरी संस्कृति के नाम से जाना जाता है ।परमात्मा और जीव के विषय में जगत गुरु का मत है कि परमात्मा माया और कर्म के अधीन नहीं हैं । जीवात्मा (जीव) माया और कर्म के अधीन है । देवी देवता से लेकर सभी प्राणी जीव ही है ।
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